Sunday, April 10, 2022

Shree Valmiki Ramayana Mahima Vol.1

॥ श्रीसीतारामचन्द्राभ्यां नमः ॥
श्रीमदवाल्मीकीयरामायणमाहात्म्यम्
नमः ।
11
प्रथमोऽध्यायः
कलियुगकी स्थिति, कलिकाल के मनुप्पोंके उद्धारका उपाय, रामायणपाठ,
उसकी महिमा, उसके श्रवणके लिये उत्तम काल आदिका वर्णन
श्रीरामः शरणं समस्तजगतां
एतत्संसारपाशस्यच्छेदकः कतमः स्मृतः ।
राम
विना का
गती
रामेण प्रतिहन्यते कलिमलं
कलो वेदोकमार्गाश्च नश्यन्तीति त्वयोदिताः ॥ ५ ॥
इस संसारबन्धनका उच्छेद करनेवाला कौन है ? आपने
रामाय कार्य
रामात् त्रस्यति कालभीमभुजगो
कहा है कि कलियुगी वेदोक्त नाग नष्ट हो जायेंगे ।। ५ ।।
अधर्मनिरतानां च यातनाश्च प्रकीर्तिताः ।
रामय
सर्व वशे
रामे भक्तिरखण्डिता
घोरे कलियुगे प्राप्ते वेदमार्गवहिकृते ॥ ६ ॥
अवतु
पाखण्डत्वं प्रसिद्धं च सर्वश्च परिकीर्तितम् ।
राम त्वमेवाश्रयः ॥ १ ॥
अधर्मपरायण पुरुपोको प्राप्त होनेवाली यातनाओंका
श्रीरामचन्द्रजी समस्त संसारको शरण देनेवाले है ।
भी पाने वर्णन किया है । बोर कलियुग आनेपर जब
श्रीरामके बिना दूसरी कौन-सो गति है । श्रीराम कलियुगके वेदोक्त मार्ग ला हो जाय ।। उस समय पाखण्ड फैल
समस्त दोषोंको नष्ट कर देते हैं; अतः श्रीरामचन्द्रजीको
जायगा यह बात प्रसिद्ध है। प्रायः सभी लोगान ऐसी बात
नमस्कार करना चाहिये । श्रीरामसे कालरूपी भयंकर सर्प भी
डरता है । जगत्का सब कुछ भगवान् श्रीराम के वशमें है ।
कामार्त्ता हस्खदेवाश्च लुब्धा अन्योन्यतत्पराः ॥
श्रीराममें मेरी अखण्ड भक्ति बनी रहे । हे राम ! आप ही कलौ सर्वे भविष्यन्ति स्वल्पायुर्वहुपुत्रकाः ।
मेरे आधार हैं ।। १ ॥
कलियुगो सभी लोग काम्वेदनासे पीड़ित, नाटे शरीरके
चित्रकूटालयं राममिन्दिरानन्दमन्दिरम् । और लोभी होंगे तथा धर्म और ईश्वरका आश्रय छोड़कर
वन्दे च परमानन्दं भक्तानामभयप्रदम् ॥ २ ॥ आपसमें एक दूसरेपर ही निर्भर रहनेवाले होंगे । प्रायः सब लोग
चित्रकुटमें निवास करनेवाले, भगवती लक्ष्मी ( सीता ) थोड़ी आयु और अधिक संतानवाले होंगे| ॥ ७३ ।।
के आनन्दनिकेतन और, भकोंको अभय देनेवाले परमानन्द-
स्नियः स्वपोषणपरा वेश्याचरणतत्पराः ॥
स्वरूप भगवान् श्रीरामचन्द्र जीको में नमस्कार करता हूँ ।।२।।
पतिवाक्यमनाहत्य सदान्यगृहतत्पराः।
ब्रह्मविष्णुमहेशाधा यस्यांशा लोकसाधकाः ।
दुःशीलेषु करिष्यन्ति पुरुषेषु सदा स्पृहाम् ॥ ९ ॥
नमामि देवं चिद्रूपं विशुद्धं परमं भजे ॥ ३ ॥ उस युगकी स्त्रियाँ अपने ही शरीरके पोषणमें तत्पर और
सम्पूर्ण जगत्के अभीट मनोरथ को सिद्ध करनेवाले वेश्याओं के समान आचरणमें प्रवृत्त होंगी। वे अपने पतिको
(अथवा सृष्टि, पालन एवं संहारके द्वारा जगत्की
आज्ञाका अनादर करके सदा दूसरों के घर जाया-आया करेंगी।
व्यावहारिक सत्ताको सिद्ध करनेवाले ), ब्रह्मा, विष्णु और दुराचारी पुरुषोंसे मिलनेकी सदैव अभिलाषा करेंगी ॥८-९॥
महेश आदि देवता जिनके अभिन्न अंशमात्र है, उन परम असद्वाती भविष्यन्ति पुरुषेषु कुलाङ्गनाः ।
विशुद्ध सच्चिदानन्दमय परमात्मदेव श्रीरामचन्द्रजीको मैं
देहसंस्कारवर्जिताः ॥ १० ॥
नमस्कार करता हूँ तथा उन्होंके भजन-चिन्तनमें मन
उत्तम कुलकी स्त्रियाँ भी परपुरुषों के निकट ओछी बातें
लगाता हूँ ॥ ३॥
करनेवाली होगी, कठोर और असत्य बोलेंगी तथा शरीरको
ऋषय ऊचुः
शुद्ध और सुसंस्कृत बनाये रखने के सद्गुणोंसे वञ्चित होगी।
भगवन् सर्वमाख्यातं यत् पृष्टं विदुषा त्वया ।
संसारपाशवद्धानां दुःखानि सुबहूनि च ॥ ४ ॥ भिक्षवश्चापि मित्रादिस्नेहसम्बन्धयन्त्रिताः ॥ ११ ॥
कलियुगमें अधिकां। स्त्रियाँ वाचाल (व्यर्थ बकवास
ऋषियोंने कहा-भगवन् ! आप विद्वान् हैं, ज्ञानी
+ किसी-किसी प्रतिमें स्वल्पायुर्वहुपुत्रकाः' के स्थानमें
हैं। हमने जो कुछ पूछा था, वह सब आपने हमें भलीभाँति
जीवोंके
'स्वल्परायोबहुप्रजाः' पाठ है । इसके अनुसार कलियुगमें प्रायः सब
बताया है । संसार-बन्धनमें बंधे
लोग थोड़े धन और अधिक संतानवाले होंगे; ऐसा अर्थ समझना
* इस लोकमें सम्बोधनसहित सभी विभक्तियों में 'राम' शब्दके
चाहिये।
रूप आ गये हैं।
८ ॥
परुपानृतभाषिण्यो
वाचालाश्च भविष्यन्ति कलौ प्रायेण योषितः ।
दुःख बहुत है।
Jay Shree Ramam sharanm mam aum.

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